ऐ नए साल बता कि तुझमें नया क्या है हर तरफ खल्क ने क्यूँ शोर मचा रखा है। तू नया है तो दिखा सुबह नई शाम नई वर्ना इन आँखों ने देखे हैं ऐसे साल कई।

तपिश से बच कर घटाओं में बैठ जाते हैं गए हुए की सदाओं में बैठ जाते हैं हम अपनी उदासी से जब भी घबराये तेरे ख़याल की छाँव में बैठ जाते हैं।