पर मुँह से एक शब्द भी नहीं निकाला।

सहती रहो माँ ने कहा था। सहती जाओगी तो धरती कहलाओगी दादी ने कहा। फिर वो भी कभी बही सरिता बन कभी पहाड़ हो गई कभी किसी अंकुर की माँ हो गई पर मुँह से एक शब्द भी नहीं निकाला। एक स्त्री से अन्य तक पहुँची…
बुरे लोग मुश्किलों में साथ देने की महँगी कीमत वसूलते हैं.

बुरा समय बीत जाता है लेकिन, बुरे लोग मुश्किलों में साथ देने की महँगी कीमत वसूलते हैं.  इसलिए हमें खुद को इतना सक्षम बनाना चाहिए कि बुरे वक्त में भी किसी बुरे व्यक्ति की मदद न लेनी पड़े. कर्ण ने…

अगर आप किसी को धोखा देने में कामयाब हो जाते हैं तो मान कर चलना की  ऊपर वाला भी आपको धोखा देगा क्योकि उसके यहाँ हर बात का इन्साफ जरूर होता है

मुझे ईश्वर मिले न मिले दिया जरुर जलाऊंगा चाहे,,,,, हो सकता है दीपक की रोशनी से किसी मुसाफिर को ठोकर न लगे….!!

  मैं क्या लिखूँ….जिसकी कद्र जमाना करे…!!  ये सोच आज “माँ” लिख दिया…..!!