ये बारिश का मौसम बहुत तड़पाता है वो बस मुझे ही दिल से चाहता है लेकिन वो मिलने आए भी तो कैसे ? उसके पास न रेनकोट है और ना छाता है।

अजीब रंग का मौसम चला है कुछ दिन से नज़र पे बोझ है और दिल खफा है कुछ दिन से वो और थे जिसे तू जानता था बरसों से मैं और हूँ जिसे तू मिल रहा है कुछ दिन से।

उसे इस बार वफ़ाओं से गुज़र जाने की जल्दी थी मगर अबके मुझे अपने घर जाने की जल्दी थी मैं आखिर कौन सा मौसम तुम्हारे नाम कर देता यहाँ हर एक मौसम को गुज़र जाने की जल्दी थी।

आज अम्बर में बादल छाए है बारिश के कुछ आसार लग रहे हैं हो जाए तो बहुत अच्छा है वरना पंखे कूलर भी अब अंगार लग रहे हैं पसीने से तर कपडे और यह मच्छर उसपे लाइट के कट बार