navratri

दुर्गा चालीसा ॥ शुभ नवरात्री ॥ ॥ जय माता दी ॥

  नमो नमो दुर्गे सुख करनी । नमो नमो अम्बे दुःख हरनी ॥ निराकार है ज्योति तुम्हारी । तिहूँ लोक फैली उजियारी ॥   शशि

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पर मुँह से एक शब्द भी नहीं निकाला।

सहती रहो माँ ने कहा था। सहती जाओगी तो धरती कहलाओगी दादी ने कहा। फिर वो भी कभी बही सरिता बन कभी पहाड़ हो गई कभी किसी अंकुर की माँ

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