पर मुँह से एक शब्द भी नहीं निकाला।

सहती रहो माँ ने कहा था। सहती जाओगी तो धरती कहलाओगी दादी ने कहा। फिर वो भी कभी बही सरिता बन कभी पहाड़ हो गई कभी किसी अंकुर की माँ

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बुरे लोग मुश्किलों में साथ देने की महँगी कीमत वसूलते हैं.

बुरा समय बीत जाता है लेकिन, बुरे लोग मुश्किलों में साथ देने की महँगी कीमत वसूलते हैं.  इसलिए हमें खुद को इतना सक्षम बनाना चाहिए

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Զเधे_Զเधे

🎭गजब” “की” “बांसुरी” “बजती” “हैं” “वृन्दावन” “में” “कन्हैया” “की” “तारीफ” “करूँ” “मुरली” “की” “या” “मुरलीधर” “कन्हैया” “की” “जहाँ” “बस” “चलता” “न” “था” “तीरों” “और” “कमानों”

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