कलम के कीड़े हैं – दो लाइन शायरी

कलम के कीड़े हैं – दो लाइन शायरी

कलम के कीड़े हैं हम जब भी मचलते हैं खुरदुरे कागज पे रेशमी ख्वाब बुनते हैं।

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